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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 186

नंबर 186किताब 3, नंबर 19
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ، وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ مَنْ صَلَّى رَكْعَةً لَمْ يَقْرَأْ فِيهَا بِأُمِّ الْقُرْآنِ فَلَمْ يُصَلِّ إِلاَّ وَرَاءَ الإِمَامِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Abu Nuaym Wahb ibn Kaysan that he heard Jabir ibn Abdullah say, "Someone who prays a raka without reciting the umm al-Qur'an in it has not done the prayer except behind an imam
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।