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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 180

नंबर 180किताब 3, नंबर 13
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ رُومَانَ، أَنَّهُ قَالَ كُنْتُ أُصَلِّي إِلَى جَانِبِ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ فَيَغْمِزُنِي فَأَفْتَحُ عَلَيْهِ وَنَحْنُ نُصَلِّي ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Yazid ibn Ruman said, "I used to pray next to Nafi ibn Jubayr ibn Mutim and he would nudge me to prompt him while we were praying
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।