सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 156

नंबर 156किताब 3, नंबर 11
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، أَذَّنَ بِالصَّلاَةِ فِي لَيْلَةٍ ذَاتِ بَرْدٍ وَرِيحٍ فَقَالَ أَلاَ صَلُّوا فِي الرِّحَالِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَأْمُرُ الْمُؤَذِّنَ إِذَا كَانَتْ لَيْلَةٌ بَارِدَةٌ ذَاتُ مَطَرٍ يَقُولُ ‏ "‏ أَلاَ صَلُّوا فِي الرِّحَالِ ‏"‏ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi that Abdullah ibn Umar called the adhan on a cold and windy night and included the phrase, "Do the prayer in shelter." Then he said, "The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, used to orderthe muadhdhin to say, 'Do the prayerin shelter' when it was a cold, rainy night
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।