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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1238

नंबर 1238किताब 29, नंबर 35
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، قَرَأَ ‏{‏يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِذَا طَلَّقْتُمُ النِّسَاءَ فَطَلِّقُوهُنَّ‏}‏ لِقُبُلِ عِدَّتِهِنَّ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ يَعْنِي بِذَلِكَ أَنْ يُطَلِّقَ فِي كُلِّ طُهْرٍ مَرَّةً ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Abdullah ibn Dinar said, "I heard Abdullah ibn Umar recite from the Qur'an, 'Prophet! When you divorce women, divorce them at the beginning of their idda.'" Malik said, "He meant by that, to make one pronouncement of divorce at the beginning of each period of purity
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।