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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1182

नंबर 1182किताब 29, नंबर 6
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، أَنَّهُ قَالَ أَيُّمَا رَجُلٍ تَزَوَّجَ امْرَأَةً وَبِهِ جُنُونٌ أَوْ ضَرَرٌ فَإِنَّهَا تُخَيَّرُ فَإِنْ شَاءَتْ قَرَّتْ وَإِنْ شَاءَتْ فَارَقَتْ ‏.‏ قَالَ مَالِكٌ فِي الأَمَةِ تَكُونُ تَحْتَ الْعَبْدِ ثُمَّ تَعْتِقُ قَبْلَ أَنْ يَدْخُلَ بِهَا أَوْ يَمَسَّهَا إِنَّهَا إِنِ اخْتَارَتْ نَفْسَهَا فَلاَ صَدَاقَ لَهَا وَهِيَ تَطْلِيقَةٌ وَذَلِكَ الأَمْرُ عِنْدَنَا ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that Said ibn al-Musayyab said that if a man married a woman, and he was insane or had a physical defect, she had the right of choice. If she wished she could stay, and if she wished she could separate from him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।