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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1146

नंबर 1146किताब 28, नंबर 56
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ، وَعُرْوَةَ بْنَ الزُّبَيْرِ، كَانَا يَقُولاَنِ فِي الرَّجُلِ يَكُونُ عِنْدَهُ أَرْبَعُ نِسْوَةٍ فَيُطَلِّقُ إِحْدَاهُنَّ الْبَتَّةَ أَنَّهُ يَتَزَوَّجُ إِنْ شَاءَ وَلاَ يَنْتَظِرُ أَنْ تَنْقَضِيَ عِدَّتُهَا ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Rabia ibn Abi Abd ar-Rahman that al-Qasim ibn Muhammad and Urwa ibn az-Zubayr said that a man who had four wives and then divorced one of them irrevocably, could marry straightaway if he wished, and he did not have to wait for the completion of her idda
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 28 · Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।