حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنِ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلاَنِيِّ، عَنْ أَبِي ثَعْلَبَةَ الْخُشَنِيِّ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ " أَكْلُ كُلِّ ذِي نَابٍ مِنَ السِّبَاعِ حَرَامٌ " .
Yahya related to me from Malik from Ibn Shibab from Abu Idris al- Khawlani from Abu Tha~laba al-Khushani that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, "It is haram to eat animals with fangs
स्रोत में दर्ज दर्जे
ShadhSalim al-Hilali
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।