सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 1046

नंबर 1046किताब 24, नंबर 5
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ الدِّيلِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّهُ سُئِلَ عَنْ ذَبَائِحِ، نَصَارَى الْعَرَبِ فَقَالَ لاَ بَأْسَ بِهَا وَتَلاَ هَذِهِ الآيَةَ ‏{‏وَمَنْ يَتَوَلَّهُمْ مِنْكُمْ فَإِنَّهُ مِنْهُمْ ‏}‏‏.‏
Yahya related to me from Malik from Thawr ibn Zayd ad-Dili that Abdullah ibn Abbas was asked about animals slaughtered by the Christian Arabs. He said, "There is no harm in them," but he recited this ayat, "Whoever takes them as friends is from them." (Sura 5 ayat)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Slaughtering Animals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।