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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 925

नंबर 925किताब 20, नंबर 221
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، قَالَ مَنْ رَمَى الْجَمْرَةَ ثُمَّ حَلَقَ أَوْ قَصَّرَ وَنَحَرَ هَدْيًا - إِنْ كَانَ مَعَهُ - فَقَدْ حَلَّ لَهُ مَا حَرُمَ عَلَيْهِ إِلاَّ النِّسَاءَ وَالطِّيبَ حَتَّى يَطُوفَ بِالْبَيْتِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi and Abdullah ibn Dinar from Abdullah ibn Umar that Umar ibn al-Khattab said, "When someone has stoned the jamra and shaved his head or cut off some of his hair and sacrificed an animal, whatever was haram for him becomes halal, except women and scent, (which remain haram for him) until he has done tawaf of the House
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।