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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 895

नंबर 895किताब 20, नंबर 191
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، كَانَ إِذَا أَرَادَ أَنْ يُحْرِمَ دَعَا بِالْجَلَمَيْنِ فَقَصَّ شَارِبَهُ وَأَخَذَ مِنْ لِحْيَتِهِ قَبْلَ أَنْ يَرْكَبَ وَقَبْلَ أَنْ يُهِلَّ مُحْرِمًا ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had heard that when Salim ibn Abdullah intended to go into ihram he would call for some scissors and trim his moustache and beard before setting off and before going into ihram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।