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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 853

नंबर 853किताब 20, नंबर 149
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ لِبَنِيهِ يَا بَنِيَّ لاَ يُهْدِيَنَّ أَحَدُكُمْ مِنَ الْبُدْنِ شَيْئًا يَسْتَحْيِي أَنْ يُهْدِيَهُ لِكَرِيمِهِ فَإِنَّ اللَّهَ أَكْرَمُ الْكُرَمَاءِ وَأَحَقُّ مَنِ اخْتِيرَ لَهُ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Hisham ibn Urwa that his father used to say to his sons, "My sons, let none of you sacrifice any animal which he would be ashamed to sacrifice for a noble woman, for surely Allah is the noblest of noble ones, and the most deserving of those for whom things are chosen
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।