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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 829

नंबर 829किताब 20, नंबर 125
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، وَهُوَ عَلَى الصَّفَا يَدْعُو يَقُولُ اللَّهُمَّ إِنَّكَ قُلْتَ ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ وَإِنَّكَ لاَ تُخْلِفُ الْمِيعَادَ وَإِنِّي أَسْأَلُكَ كَمَا هَدَيْتَنِي لِلإِسْلاَمِ أَنْ لاَ تَنْزِعَهُ مِنِّي حَتَّى تَتَوَفَّانِي وَأَنَا مُسْلِمٌ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi that he heard Abdullah ibn Umar making dua on Safa saying, "O Allah, You have said, 'call on Me - I will answer you' and You do not break Your promise. So I am askingYou, in the same way that You have guided me to Islam, not to take it away from me, and that You make me die while I am muslim
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।