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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 807

नंबर 807किताब 20, नंबर 103
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ شِهَابٍ، يَقُولُ سَمِعْتُ بَعْضَ، عُلَمَائِنَا يَقُولُ مَا حُجِرَ الْحِجْرُ فَطَافَ النَّاسُ مِنْ وَرَائِهِ إِلاَّ إِرَادَةَ أَنْ يَسْتَوْعِبَ النَّاسُ الطَّوَافَ بِالْبَيْتِ كُلِّهِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he heard Ibn Shihab say that he had heard one of the people of knowledge say that the Hijr was only enclosed so that people would go beyond it as they were making tawaf, and their tawaf would therefore encompass the original House
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।