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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 794

नंबर 794किताब 20, नंबर 90
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَيُّوبَ بْنِ مُوسَى، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، نَظَرَ فِي الْمِرْآةِ لِشَكْوٍ كَانَ بِعَيْنَيْهِ وَهُوَ مُحْرِمٌ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Ayyub ibn Musa that Abdullah ibn Umar once looked in the mirror for something that was irritating him while he was in ihram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।