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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 746

नंबर 746किताब 20, नंबर 42
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ، كَانَ يُلَبِّي فِي الْحَجِّ حَتَّى إِذَا زَاغَتِ الشَّمْسُ مِنْ يَوْمِ عَرَفَةَ قَطَعَ التَّلْبِيَةَ ‏.‏ قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِكٌ وَذَلِكَ الأَمْرُ الَّذِي لَمْ يَزَلْ عَلَيْهِ أَهْلُ الْعِلْمِ بِبَلَدِنَا ‏.‏
Yahya related to me from Malik, from Jafar ibn Muhammad, from his father, that AIi ibn Abi Talib used to say the talbiya while on hajj until after noon on the day of Arafa, when he would stop doing so. Yahya said that Malik said, "This is what the people of knowledge in our city are still doing
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।