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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 76

नंबर 76किताब 2, नंबर 45
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍ عَنِ الْمَسْحِ، عَلَى الْخُفَّيْنِ كَيْفَ هُوَ فَأَدْخَلَ ابْنُ شِهَابٍ إِحْدَى يَدَيْهِ تَحْتَ الْخُفِّ وَالأُخْرَى فَوْقَهُ ثُمَّ أَمَرَّهُمَا ‏.‏ قَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِكٌ وَقَوْلُ ابْنِ شِهَابٍ أَحَبُّ مَا سَمِعْتُ إِلَىَّ فِي ذَلِكَ ‏.‏
Yahya related to me that Malik had asked Ibn Shihab how to wipe over leather socks. Ibn Shihab had put one hand under the sock and his other hand above the sock and then passed them over it. Yahya said that Malik said, "Out of all that I have heard about the matter I like what Ibn Shihab said the most
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Purity

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।