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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 143

नंबर 143किताब 2, नंबर 112
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنِ ابْنِ السَّبَّاقِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ فِي جُمُعَةٍ مِنَ الْجُمَعِ ‏ "‏ يَا مَعْشَرَ الْمُسْلِمِينَ إِنَّ هَذَا يَوْمٌ جَعَلَهُ اللَّهُ عِيدًا فَاغْتَسِلُوا وَمَنْ كَانَ عِنْدَهُ طِيبٌ فَلاَ يَضُرُّهُ أَنْ يَمَسَّ مِنْهُ وَعَلَيْكُمْ بِالسِّوَاكِ ‏"‏ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Ibn Shihab from Ibn as-Sabbaq that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said in a jumua, "Muslims! Allah has made this day a festival day (id) so do ghusl, and it will not harm whoever has perfume to apply some of it, and use a tooth-stick
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Purity

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।