وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّهُ قَالَ سَافَرْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي رَمَضَانَ فَلَمْ يَعِبِ الصَّائِمُ عَلَى الْمُفْطِرِ وَلاَ الْمُفْطِرُ عَلَى الصَّائِمِ .
Yahya related to me from Malik from Humayd at-Tawil that Anas ibn Malik said, "We once travelled with the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, in Ramadan, and those who were fasting did not find fault with those who were not, and those who were not fasting did not find fault with those who were
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihSalim al-Hilali
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।