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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 622

नंबर 622किताब 17, नंबर 45
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، أَنَّهُ سَأَلَ ابْنَ شِهَابٍ عَلَى أَىِّ وَجْهٍ كَانَ يَأْخُذُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ مِنَ النَّبَطِ الْعُشْرَ فَقَالَ ابْنُ شِهَابٍ كَانَ ذَلِكَ يُؤْخَذُ مِنْهُمْ فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَأَلْزَمَهُمْ ذَلِكَ عُمَرُ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that he had asked Ibn Shihab why Umar ibn al Khattab used to take a tenth from the Nabateans, and Ibn Shihab replied, "It used to be taken from them in the jahiliyya, and Umar imposed it on them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।