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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 620

नंबर 620किताब 17, नंबर 43
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، كَانَ يَأْخُذُ مِنَ النَّبَطِ مِنَ الْحِنْطَةِ وَالزَّيْتِ نِصْفَ الْعُشْرِ يُرِيدُ بِذَلِكَ أَنْ يَكْثُرَ الْحَمْلُ إِلَى الْمَدِينَةِ وَيَأْخُذُ مِنَ الْقُطْنِيَّةِ الْعُشْرَ ‏.‏
Yahya related to me from Ibn Shihab from Salim ibn Abdullah from his father that Umar ibn al-Khattab used to take a twentieth from the cereals and olive oil of the Nabatean christians, intending by that to increase the cargo to Madina. He would take a tenth from pulses
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।