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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 615

नंबर 615किताब 17, नंबर 38
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ بَلَغَنِي أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَخَذَ الْجِزْيَةَ مِنْ مَجُوسِ الْبَحْرَيْنِ وَأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ أَخَذَهَا مِنْ مَجُوسِ فَارِسَ وَأَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ أَخَذَهَا مِنَ الْبَرْبَرِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Ibn Shihab said, "I have heard that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, took jizya from the magians of Bahrain, that Umar ibn al- Khattab took it from the magians of Persia and that Uthman ibn Affan took it from the Berbers
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।