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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 613

नंबर 613किताब 17, नंबर 36
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ، أَنَّهُ قَالَ جَاءَ كِتَابٌ مِنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ إِلَى أَبِي وَهُوَ بِمِنًى أَنْ لاَ يَأْخُذَ مِنَ الْعَسَلِ وَلاَ مِنَ الْخَيْلِ صَدَقَةً ‏.‏
Yahya related to me from Malik that Abdullah ibn Abi Bakr ibn Amr ibn Hazim said, "A message came from Umar ibn Abd al-Aziz to my father when he was in Mina telling him not to take zakat from either honey or horses
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Maqtu SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।