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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 582

नंबर 582किताब 17, नंबर 5
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ حُسَيْنٍ، عَنْ عَائِشَةَ بِنْتِ قُدَامَةَ، عَنْ أَبِيهَا، أَنَّهُ قَالَ ‏:‏ كُنْتُ إِذَا جِئْتُ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ أَقْبِضُ عَطَائِي سَأَلَنِي ‏:‏ هَلْ عِنْدَكَ مِنْ مَالٍ وَجَبَتْ عَلَيْكَ فِيهِ الزَّكَاةُ قَالَ فَإِنْ قُلْتُ ‏:‏ نَعَمْ أَخَذَ مِنْ عَطَائِي زَكَاةَ ذَلِكَ الْمَالِ، وَإِنْ قُلْتُ ‏:‏ لاَ، دَفَعَ إِلَىَّ عَطَائِي ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Urwa ibn Husayn from A'isha bint Qudama that her father said, "When I used to come to Uthman ibn Affan to collect my allowance he would ask me, 'Do you have any property on which zakat is due? 'If I said, 'Yes,' he would deduct the zakat on that property from my allowance, and if I said, 'No,' he would pay me my allowance (in full)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।