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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 554

नंबर 554किताब 16, नंबर 35
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عُثْمَانَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا أُمَامَةَ بْنَ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، يَقُولُ كُنَّا نَشْهَدُ الْجَنَائِزَ فَمَا يَجْلِسُ آخِرُ النَّاسِ حَتَّى يُؤْذَنُوا ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Abu Bakr ibn Uthman ibn Sahl ibn Hunayf that he had heard Abu Umama ibn Sahl ibn Hunayf say, "We used to attend funeral processions, and the last of the people would not sit until they had been given permission
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · Burials

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।