सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 547

नंबर 547किताब 16, नंबर 28
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ قَالَ كَانَ بِالْمَدِينَةِ رَجُلاَنِ أَحَدُهُمَا يَلْحَدُ وَالآخَرُ لاَ يَلْحَدُ فَقَالُوا أَيُّهُمَا جَاءَ أَوَّلُ عَمِلَ عَمَلَهُ ‏.‏ فَجَاءَ الَّذِي يَلْحَدُ فَلَحَدَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Hisham ibn Urwa that his father said, "There were two men in Madina, one of whom dug graves with a niche in the side wall for the body, and the other who did not, and they said, 'Whichever one comes first can do the job,' and the one who dug graves with a niche came first and dug the Messenger of Allah's grave, may Allah bless him and grant him peace
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · Burials

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।