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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 518

नंबर 518किताब 15, नंबर 49
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، كَانَ يَقُولُ لاَ تَحَرَّوْا بِصَلاَتِكُمْ طُلُوعَ الشَّمْسِ وَلاَ غُرُوبَهَا فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَطْلُعُ قَرْنَاهُ مَعَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَيَغْرُبَانِ مَعَ غُرُوبِهَا وَكَانَ يَضْرِبُ النَّاسَ عَلَى تِلْكَ الصَّلاَةِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Abdullah ibn Dinar from Abdullah ibn Umar that Umar ibn al-Khattab used to say, "Do not intend to do your prayer at either sunrise or sunset, for the horns of Shaytan rise with the rising of the sun and set with its setting." Umar used to beat people for that kind of prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।