وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " إِذَا بَدَا حَاجِبُ الشَّمْسِ فَأَخِّرُوا الصَّلاَةَ حَتَّى تَبْرُزَ وَإِذَا غَابَ حَاجِبُ الشَّمْسِ فَأَخِّرُوا الصَّلاَةَ حَتَّى تَغِيبَ " .
Yahya related to me from Malik from Hisham ibn Urwa that his father said that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, used to say, "Delay the prayer when the edge of the sun appears until it is completely in view, and delay the prayer when the edge of the sun is disappearing until it has completely disappeared
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihSalim al-Hilali
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।