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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 497

नंबर 497किताब 15, नंबर 28
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَقُلْ أَحَدُكُمْ إِذَا دَعَا اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي إِنْ شِئْتَ اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي إِنْ شِئْتَ لِيَعْزِمِ الْمَسْأَلَةَ فَإِنَّهُ لاَ مُكْرِهَ لَهُ ‏"‏ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Abu'z Zinad from al-Araj from Abu Hurayra that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, ''When you are making dua do not say; 'O Allah, forgive me if You wish. O Allah, forgive me if you wish.' You should be firm in your asking, for there is no compelling Him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।