सीधे कंटेंट पर जाएँ
मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 482

नंबर 482किताब 15, नंबर 13
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، مَوْلَى ابْنِ عُمَرَ أَنَّ رَجُلاً، مِنْ أَهْلِ مِصْرَ أَخْبَرَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَرَأَ سُورَةَ الْحَجِّ فَسَجَدَ فِيهَا سَجْدَتَيْنِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ هَذِهِ السُّورَةَ فُضِّلَتْ بِسَجْدَتَيْنِ ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Nafi, the mawla of Ibn Umar that a man from Egypt told him that Umar ibn al-Khattab recited Surat al-Hajj (Sura 22) and prostrated twice in it, and then said, "This sura has been given special preference by having two prostrations in it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।