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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 471

नंबर 471किताब 15, नंबर 2
حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَيُّوبَ بْنِ أَبِي تَمِيمَةَ السَّخْتِيَانِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، كَانَ فِي قَوْمٍ وَهُمْ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ فَذَهَبَ لِحَاجَتِهِ ثُمَّ رَجَعَ وَهُوَ يَقْرَأُ الْقُرْآنَ فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ أَتَقْرَأُ الْقُرْآنَ وَلَسْتَ عَلَى وُضُوءٍ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ مَنْ أَفْتَاكَ بِهَذَا أَمُسَيْلِمَةُ
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf Sahih LighairihiSalim al-Hilali
किताब 15 · The Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।