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मुवत्ता इमाम मालिक

नंबर 468

नंबर 468किताब 14, नंबर 14
وَحَدَّثَنِي عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عَاتِكَةَ بِنْتِ زَيْدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ نُفَيْلٍ، امْرَأَةِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّهَا كَانَتْ تَسْتَأْذِنُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ إِلَى الْمَسْجِدِ فَيَسْكُتُ فَتَقُولُ وَاللَّهِ لأَخْرُجَنَّ إِلاَّ أَنْ تَمْنَعَنِي ‏.‏ فَلاَ يَمْنَعُهَا ‏.‏
Yahya related to me from Malik from Yahya ibn Said that Atika bint Zayd ibn Amr ibn Nufayl, the wife of Umar ibn al-Khattab, used to ask Umar ibn al-Khattab for permission to go to the mosque. He would keep silent, so she would say, "By Allah, I will go out, unless you forbid me," and he would not forbid her
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Mauquf DaifSalim al-Hilali

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Qibla

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।