حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنْ حَجَّاجٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سُلَيْمَانَ، عَنْ عَمِّهِ، سَهْلِ بْنِ أَبِي حَثْمَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ مَسْلَمَةَ، قَالَ خَطَبْتُ امْرَأَةً فَجَعَلْتُ أَتَخَبَّأُ لَهَا حَتَّى نَظَرْتُ إِلَيْهَا فِي نَخْلٍ لَهَا فَقِيلَ لَهُ أَتَفْعَلُ هَذَا وَأَنْتَ صَاحِبُ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ " إِذَا أَلْقَى اللَّهُ فِي قَلْبِ امْرِئٍ خِطْبَةَ امْرَأَةٍ فَلاَ بَأْسَ أَنْ يَنْظُرَ إِلَيْهَا " .
मुहम्मद बिन मसलमा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने एक महिला से विवाह करने का संदेशा भेजा तथा उसको छुप कर देखने का प्रयास किया यहाँ तक कि मैंने उसे उसके एक बाग़ में देख लिया। उन से कहा गया : आप ऐसा कर रहे हैं जबकि आप अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथियों में से हैं, तो उन्होंने उत्तर दिया कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़रमाते हुए सुना है : “जब अल्लाह तआला किसी पुरुष के हृदय में किसी महिला से विवाह करने का संदेशा भेजने की बात डाल दे तो कोई हर्ज नहीं है कि वह उस महिला को देख ले।”
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।