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सुनन इब्न माजा

नंबर 1844

नंबर 1844किताब 8, नंबर 62
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنْ حَفْصَةَ بِنْتِ سِيرِينَ، عَنِ الرَّبَابِ أُمِّ الرَّائِحِ بِنْتِ صُلَيْعٍ، عَنْ سَلْمَانَ بْنِ عَامِرٍ الضَّبِّيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ الصَّدَقَةُ عَلَى الْمِسْكِينِ صَدَقَةٌ وَهِيَ عَلَى ذِي الْقَرَابَةِ اثْنَتَانِ صَدَقَةٌ وَصِلَةٌ ‏"‏ ‏.‏
Salman bin Amir Dabbi narrated that:the Messenger of Allah said: “Charity given to the poor is charity, and that given to a relative is two things: charity and upholding the ties of kinship.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · The Chapters Regarding Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।