حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُخَيْمِرَةَ، عَنْ أَبِي عَمَّارٍ، عَنْ قَيْسِ بْنِ سَعْدٍ، قَالَ أَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِصَدَقَةِ الْفِطْرِ قَبْلَ أَنْ تُنْزَلَ الزَّكَاةُ فَلَمَّا نَزَلَتِ الزَّكَاةُ لَمْ يَأْمُرْنَا وَلَمْ يَنْهَنَا وَنَحْنُ نَفْعَلُهُ .
It was narrated that:Qais bin Sa'ad said: “The Messenger of Allah (ﷺ) enjoined Sadaqatul-Fitr upon is before (the command of) Zakat was revealed. He neither ordered us (to pay) nor forbade us (from paying it), so we did it.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।