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सुनन इब्न माजा

नंबर 1797

नंबर 1797किताब 8, नंबर 15
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنِ الْبَخْتَرِيِّ بْنِ عُبَيْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِذَا أَعْطَيْتُمُ الزَّكَاةَ فَلاَ تَنْسَوْا ثَوَابَهَا أَنْ تَقُولُوا اللَّهُمَّ اجْعَلْهَا مَغْنَمًا وَلاَ تَجْعَلْهَا مَغْرَمًا ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that :the Messenger of Allah(ﷺ) said: “When you give Zakat, do not forget its reward, and say 'Allahummaj-'alha maghnaman wa la taj-'alha maghrama (O Allah! Make it a gain and do not make it a loss).' ” (Maudu)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MawduAl-Albani
  • MawduMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · The Chapters Regarding Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।