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सुनन इब्न माजा

नंबर 1795

नंबर 1795किताब 8, नंबर 13
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ زَكَرِيَّا، عَنْ حَجَّاجِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ حُجَيَّةَ بْنِ عَدِيٍّ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، أَنَّ الْعَبَّاسَ، سَأَلَ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي تَعْجِيلِ صَدَقَتِهِ قَبْلَ أَنْ تَحِلَّ فَرَخَّصَ لَهُ فِي ذَلِكَ ‏.‏
Ali bin Abu Talib narrated that :Abbas asked the Prophet about paying his Sadaqah before it is due, and he granted him permission to do that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · The Chapters Regarding Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।