حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، قَالاَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، أَنْبَأَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ وَاقِدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، وَعَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَأْخُذُ مِنْ كُلِّ عِشْرِينَ دِينَارًا فَصَاعِدًا نِصْفَ دِينَارٍ وَمِنَ الأَرْبَعِينَ دِينَارًا دِينَارًا .
Ibn 'Umar and 'Aishah narrated that:that from every twenty Dinar or more. The Prophet used to take half a Dinar and from forty Dinar, one Dinar
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।