حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ الصَّبَّاحِ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ عِكْرِمَةَ، قَالَ قَالَتْ عَائِشَةُ اعْتَكَفَتْ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ امْرَأَةٌ مِنْ نِسَائِهِ فَكَانَتْ تَرَى الْحُمْرَةَ وَالصُّفْرَةَ فَرُبَّمَا وَضَعَتْ تَحْتَهَا الطَّسْتَ .
‘Aishah said:“One of the wives of the Messenger of Allah (ﷺ) observed I’tikaf with him, and she used to see red and yellow discharge, and sometime she would put a basin beneath her.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih BukhariZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।