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सुनन इब्न माजा

नंबर 1763

नंबर 1763किताब 7, नंबर 126
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى الأَزْدِيُّ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ دَاوُدَ، وَخَالِدُ بْنُ أَبِي يَزِيدَ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ الْمَدَنِيُّ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ إِذَا نَزَلَ الرَّجُلُ بِقَوْمٍ فَلاَ يَصُومُ إِلاَّ بِإِذْنِهِمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Aishah that the Prophet (ﷺ) said:“If a man stays among a people, he should not fast without their permission.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Very DaifAl-Albani
  • Very DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।