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सुनन इब्न माजा

नंबर 1669

नंबर 1669किताब 7, नंबर 32
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، وَعَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، قَالَ: سَمِعْتُ عَائِشَةَ تَقُولُ: إِنْ كَانَ لَيَكُونُ عَلَىَّ الصِّيَامُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ فَمَا أَقْضِيهِ حَتَّى يَجِيءَ شَعْبَانُ ‏.‏
It was narrated that Abu Salamah said:“I heard ‘Aishah say: ‘I used to owe fasts from the month of Ramadan, and I would not make them up for until Sha’ban came.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।