حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ، حَدَّثَنِي ثَوْرُ بْنُ يَزِيدَ، عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ، عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ الْغَازِ، أَنَّهُ سَأَلَ عَائِشَةَ عَنْ صِيَامِ، رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقَالَتْ: كَانَ يَصُومُ شَعْبَانَ كُلَّهُ حَتَّى يَصِلَهُ بِرَمَضَانَ .
It was narrated that Rabi’ah bin Ghaz asked ‘Aishah about the fasting of the Messenger of Allah (ﷺ). She said:“He used to fast all of Sha’ban, until he joined it to Ramadan.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Isnaad SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।