حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ الْعِجْلِيُّ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ، قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَإِنَّمَا وَجْهُنَا وَاحِدٌ فَلَمَّا قُبِضَ نَظَرْنَا هَكَذَا وَهَكَذَا .
It was narrated that Ubayy bin Ka’b said:“We were with the Messenger of Allah (ﷺ) and we all had a single focus, but when he passed away we started to look here and there (i.e., have different interests).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।