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सुनन इब्न माजा

नंबर 1625

नंबर 1625किताब 6, नंबर 193
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ صَالِحٍ أَبِي الْخَلِيلِ، عَنْ سَفِينَةَ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَقُولُ فِي مَرَضِهِ الَّذِي تُوُفِّيَ فِيهِ ‏ "‏ الصَّلاَةَ وَمَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ ‏"‏ ‏.‏ فَمَا زَالَ يَقُولُهَا حَتَّى مَا يَفِيضَ بِهَا لِسَانُهُ ‏.‏
It was narrated from Umm Salamah that the Messenger of Allah (ﷺ) used to say, during the illness that would be his last:“The prayer, and those whom your hands possess.”* And he kept on saying it until his tongue could no longer utter any words
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · Chapters Regarding Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।