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सुनन इब्न माजा

नंबर 1616

नंबर 1616किताब 6, नंबर 184
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ الدَّرَاوَرْدِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا سَعْدُ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ كَسْرُ عَظْمِ الْمَيِّتِ كَكَسْرِهِ حَيًّا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Aishah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Breaking the bones of the deceased is like breaking his bones when he is alive.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · Chapters Regarding Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।