حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَنْبَأَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ أَيُّوبَ بْنِ هَانِئٍ، عَنْ مَسْرُوقِ بْنِ الأَجْدَعِ، عَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " كُنْتُ نَهَيْتُكُمْ عَنْ زِيَارَةِ الْقُبُورِ فَزُورُوا الْقُبُورَ فَإِنَّهَا تُزَهِّدُ فِي الدُّنْيَا وَتُذَكِّرُ الآخِرَةَ " .
It was narrated from Ibn Mas’ud that the Messenger of Allah (ﷺ) said, “I used to forbid you to visit the graves, but now visit them, for they will draw your attention away from this world and remind you of the Hereafter.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।