حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنِ الْمُثَنَّى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ، عَنْ حُذَيْفَةَ بْنِ أَسِيدٍ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ خَرَجَ بِهِمْ فَقَالَ " صَلُّوا عَلَى أَخٍ لَكُمْ مَاتَ بِغَيْرِ أَرْضِكُمْ " . قَالُوا: مَنْ هُوَ؟ قَالَ: " النَّجَاشِيُّ " .
It was narrated from Hudhaifah bin Asid that the Prophet (ﷺ) led them out and said:“Pray for a brother of yours who has died in a land other than yours.” They said: “Who is he?” He said: “Najashi.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।