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सुनन इब्न माजा

नंबर 1535

नंबर 1535किताब 6, नंबर 103
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ خَلَفٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ زِيَادٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، ح وَحَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، جَمِيعًا عَنْ يُونُسَ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَبِي الْمُهَلَّبِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ الْحُصَيْنِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ إِنَّ أَخَاكُمُ النَّجَاشِيَّ قَدْ مَاتَ فَصَلُّوا عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَقَامَ فَصَلَّيْنَا خَلْفَهُ وَإِنِّي لَفِي الصَّفِّ الثَّانِي فَصَلَّى عَلَيْهِ صفَّين‏.‏
It was narrated from ‘Imran bin Husain:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘Your brother Najashi has died, so offer the funeral prayer for him.” Then he stood and we prayed behind him. I was in the second row and two rows prayed for him.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · Chapters Regarding Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।