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सुनन इब्न माजा

नंबर 1486

नंबर 1486किताब 6, नंबर 54
حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْجُهَنِيُّ، أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ عُمَرَ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، حَدَّثَهُ عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ لاَ تُؤَخِّرُوا الْجِنَازَةَ إِذَا حَضَرَتْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Ali bin Abu Talib that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Do not delay the funeral once it is ready.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · Chapters Regarding Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।