حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ مُسَافِرٍ، حَدَّثَنِي كَثِيرُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ بُرْقَانَ، عَنْ مَيْمُونِ بْنِ مِهْرَانَ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ، قَالَ قَالَ لِي النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " إِذَا دَخَلْتَ عَلَى مَرِيضٍ فَمُرْهُ أَنْ يَدْعُوَ لَكَ فَإِنَّ دُعَاءَهُ كَدُعَاءِ الْمَلاَئِكَةِ " .
It was narrated that ‘Umar bin Al-Khattab said:“The Prophet (ﷺ) said to me: ‘When you enter upon one who is sick, tell him to pray for you, for his supplication is like the supplication of the angels.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
Very DaifAl-Albani
Very DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।