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सुनन इब्न माजा

नंबर 998

नंबर 998किताब 5, नंबर 196
حَدَّثَنَا أَبُو ثَوْرٍ، إِبْرَاهِيمُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا أَبُو قَطَنٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ خِلاَسٍ، عَنْ أَبِي رَافِعٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ لَوْ يَعْلَمُونَ مَا فِي الصَّفِّ الأَوَّلِ لَكَانَتْ قُرْعَةٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘If they knew what (goodness) there is in the first row, they would cast lots for it.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Establishing the Prayer and the Sunnah Regarding Them

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।